गर्भाशय (Uterus) में होने वाली बीमारियों की एक सूची

Garbhashay ki Bimariya | गर्भाशय की बीमारियाँ | Uterus Problems
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गर्भाशय या गर्भ जिसे बच्चेदानी के नाम से भी जाना जाता है, महिला के प्रजनन अंगों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यही वह स्थान है, जहाँ से एक नए जीवन की शुरुआत होती है और शुरुआत के नौ महीने इसी जगह फलता-फूलता है। यदि महिला के इस अंग में किसी प्रकार की कोई भी समस्या आती है, तो उसका सीधा असर उसके संपूर्ण स्वास्थ्य समेत उसकी गर्भावस्था और उसके बच्चे पर भी पड़ता है।

यदि किसी महिला को गर्भाशय से सम्बंधित कोई भी समस्या होती है, तो इसके लक्षण अनियमित रक्त स्त्राव, अत्यधिक या बेहद कम रक्त स्त्राव, रक्त के रंग में बदलाव, दो पीरियड्स के बीच रक्त स्त्राव, पीरियड्स के दौरान अत्यधिक दर्द और ऐंठन, अंतरंगता के दौरान अत्यधिक दर्द और रक्त स्त्राव के रूप में देखने को मिल सकते हैं।

ऐसे में एक दो महीना तो ठीक है, लेकिन यदि महिला इससे ज़्यादा समय तक इसे नज़रअंदाज़ करती है, तो बीमारी धीरे-धीरे ऐसी स्थिति में पहुँच जाती है, जहाँ से उसका उपचार जटिल हो जाता है। हम अपने इस लेख में महिला के गर्भ में पनपने वाली उन आम और गंभीर बीमारियों के बारे में बात कर रहें हैं, जो गर्भ में पनप सकती हैं।

महिला के यूट्रस या गर्भ में पनपने वाली बीमारियाँ

गर्भाशय फाइब्रॉएड (Uterine Fibroids or Leiomyoma)-  गर्भाशय फाइब्रॉएड गर्भाशय की दीवार पर बनी, बड़ी के  नाम से भी जाना जाता है।            

एंडोमेट्रियोसिस या पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम (Endometriosis or Polycystic Ovary Syndrome or PCOS)-  इस बिमारी में ओवरी (अंडाशय) की बाहरी दीवार पर छोटे-छोटे दाने या अल्सर जैसी संरचनाएं बन जाती हैं।

गर्भाशय कर्क रोग या कैंसर (Uterine Cancer)-  यह गर्भाशय से शुरू होने वाला कैंसर होता है। जो गर्भाशय की दीवारों पर पनपता है।

कष्टार्तव (Dysmenorrhea or Painful Periods)- इसमें पीरियड्स के दौरान अत्यधिक दर्द और ऐंठन होती है।

श्रोणि सूजन की बीमारी (Pelvic Inflammatory Disease-PID)- यानी प्रजनन अंगों में संक्रमण के कारण सूजन आना।

अत्यार्तव (Menorrhagia)- यानी पीरियड्स (माहवारी) के दौरान अत्यधिक रक्तस्त्राव होना।

ग्रंथिपेश्यर्बुदता (Adenomyosis)- इसमें गर्भाश्य की दीवारों पर पहले कोशिकाएं एकत्रित होती हैं और फिर पीरियड्स के दौरान निकलने लगती हैं।  इससे गर्भाशय का आकार बढ़ जाता है और पीरियड्स के दौरान दर्द होता है।  

अंतर्गर्भाशयकला कैंसर (Endometrial Cancer)- गर्भाशय की दीवार पर पनपने वाला कैंसर।

डिम्बग्रंथि पुटीका (Ovarian Cyst)- अंडाशय या ओवरी की भीतरी या बाहरी दीवार पर सिस्ट (बड़ी फुंसियों जैसी संरचना) बन जाना।

पोलिप  (Polyp)-  जनन अंगों पर कहीं भी उत्तकों का इकट्ठा होकर गाँठ का रूप ले लेना।

यूट्राइन प्रोलेप्स (गर्भ का खिसकना) (Uterine Prolapse)- इसमें गर्भ अपने स्थान से खिसक कर नीचे की तरफ आ जाता है।

ग्रीवा कैंसर (Cervical Cancer)- गर्भाशय ग्रीवा यानी गर्भाशय के सबसे नीचले हिस्से में कैंसर।

आसंजन (Uterine Adhesion) or आशेरमैन सिंड्रोम (Asherman’s Syndrome)- इस बिमारी में गर्भाशय की भीतर की दीवारों पर ख़राब उत्तक आपस में चिपक जाते हैं।

अस्थानिक गर्भावस्था (Ectopic Pregnancy)- इसमें बच्चे के बनने की शुरुआत गर्भाशय से बाहर यानी फेलोपियन ट्यूब में हो जाती है।

पायोमेट्रा (Pyometra)- इस समस्या में गर्भाशय में संक्रमण हो जाता है।

एंडोमेट्रियल पॉलीप (Endometrial Polyp)- यह भी गर्भाशय की भीतरी दीवारों पर उत्तकों की गाँठ होती है और कैंसर नहीं होती।

गर्भाशयग्रीवाशोथ (Cervicitis)- इसमें गर्भाशय की ग्रीवा यानी (नीचे की और आने वाली नली) में सूजन आ जाती है।

गर्भाशयशोथ (Metritis)- यानी गर्भाशय की दीवारों में सूजन आ जाना।

रजोरोध या ऋतुरोध (Amenorrhea)- महिलाओं को पीरियड आने बंद हो जाना। या फिर एक एक महीना छोड़ कर आना।

डाइडेल्फिस (Didelphys)- यानी दो गर्भाशय, दो गर्भाशय ग्रीवा और कभी-कभी दो जनन अंग भी।

बाँझपन (Female Infertility)- जिसमें एक महिला माँ नहीं बन सकती।

प्लेसेंटा का न निकलना (Retained Placenta)- इसमें बच्चे के जन्म के आधे घंटे बाद भी प्लेसेंटा (गर्भनाल) माँ के शरीर से नहीं निकलता।

गर्भाशय का क्षतिग्रस्त होना या चोट लगना (Uterine Rupture)- यानी यूट्रस का क्षतिग्रस्त (टूट-फूट) हो जाना। यदि ऐसे में महिला गर्भवती हो तो होने वाले बच्चे का समय से पहले जन्म या गर्भपात भी हो सकता है।

मुलरियन एजेंसिस (Mullerian Agenesis)- यह एक ऐसी समस्या होती है, जिसमें किसी महिला को जन्म से ही गर्भाशय या गर्भाशय ग्रीवा नहीं होती।

हेमाटोमेट्रा  (Hematometra)- यानी गर्भाशय में रक्त इकट्ठा होते रहना।

पैल्विक या श्रोणि अंग विस्तार (Pelvic Organ Prolapse)- यानी किसी भी पैल्विक अंग जैसे  मूत्राशय का पेट के निचले हिस्से में आ जाना। इससे प्रजनन नलिका (Vagina) की दीवारों पर दबाव बढ़ने लगता है।

बेसिकमेट गर्भाशय (Bicornuate Uterus)- एक ऐसी समस्या जिसमें महिला गर्भधारण तो करती है, लेकिन बीच में ही उसका गर्भपात बार-बार हो जाता है।

गर्भाशय में जन्मजात कमी (विकृति) (Uterine Malformation)- यह एक ऐसी समस्या होती है, जिसमें जन्म के समय से ही महिला के गर्भाशय में किसी न किसी तरह की समस्या होती है, या वह अपने सही आकार में नहीं होता।

गर्भाशय ग्रीवा के स्टेनोसिस (Stenosis of Uterine Cervix)- यानी गर्भाशय ग्रीवा का बेहद संकीर्ण (सिकुड़ा हुआ होना)

साल्पिंगिटिस  (Salpingitis)-  यानि फेलोपियन ट्यूब की सूजन।

डिम्बग्रंथि रोग (Ovarian Disease)-  यानी महिला की डिंबग्रंथि (अंडाशय) में किसी प्रकार की कोई समस्या होना। जिससे वह हर महीने सामान्य  तरीके से अंडाणु (एग) नहीं बना पाती।

बाधित प्रसव (Obstructed Labour)- महिला के गर्भ में संकुचन होने के बाद भी प्रसव नहीं हो पाता।

 

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