गर्भाशय में रसोली या फाइब्रॉइड की समस्या

फाइब्रॉइड, जिसे शुद्ध हिंदी भाषा में गर्भाशय (बच्चेदानी) की रसोली के नाम से जाना जाता है, गर्भाशय (यूट्रस) में पनपने वाली एक ऐसी समस्या है, जिसमें गर्भाशय की दीवार पर गाँठ बन जाती है। यह गाँठ गर्भाशय की ही दीवार की मांशपेशीयों की कोशिकाओं और संयोजी उत्तकों से मिल कर बनती है। गाँठ जब बननी शुरू होती है, तो यह बेहद छोटी, गेहूँ के दाने जितनी होती है। आकार बढ़ते-बढ़ते धीरे-धीरे अंगूर और फिर छोटी गेंद जितना भी हो जाता है। छोटी-छोटी कई गाँठें भी हो सकती हैं या फिर एक भी हो सकती है।

Garbhasy me Rasoli | गर्भाशय में रसोली | Rasoli in Uterus
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वैसे तो इस समस्या के होने का समय 30 से 35 के बीच माना जाता है, लेकिन आजकल यह बेहद कम यानी 30 से कम उम्र की महिलाओं में भी देखने को मिलती है। या यूं कहें कि फाइबर के मामले बढ़ते जा रहें हैं। फाइब्रॉइड को मायोमास, लेयोमायमास, या फाइब्रोमास के नाम से भी जाना जाता है। वैसे तो यह समस्या स्वास्थ्य के लिए घातक नहीं होती लेकिन जिन महिलाओं की अभी शादी हुई है या होनी है और उन्हें अभी बच्चों को जन्म देना है, उनके लिए यह समस्या बेहद गंभीर भी हो सकती है।

दरअसल जब तक यह रसोली Fibroid आकार में छोटी होती है इसका ट्रीटमेंट दवाओं के द्वारा किया जा सकता है, लेकिन यदि ट्यूमर का आकार बहुत ज़्यादा बढ़ जाए तो गर्भाशय की यह गाँठ दवाओं के द्वारा घुल नहीं पाती और इसका एक मात्र ऑपरेशन के द्वारा गर्भ को निकलवा देना होता है। ऐसे में जिन महिलाओं को अभी माँ बनना है, उनके लिए यह परेशानी का सबब बन जाती है।

इस समस्या से जुड़ी एक और समस्या यह है कि इसकी जानकारी ज़्यादातर लड़कियों और महिलाओं को काफी समय तक नहीं लग पाती। ज़्यादातर मामलों में देखा यही जाता है कि जब महिला को ज़्यादा समस्या होती है और वह डॉक्टर के पास जाती है, या प्रेग्नेंसी की योजना बनाती है तब जाँच में यह परेशानी सामने आकार महिला समेत उसके पूरे परिवार को चौंका देती है।

फाइब्रॉइड या गर्भाशय की रसोली से बचने के लिए महिलाओं के लिए यह बेहद आवश्यक होता है कि यदि उन्हें पीरियड्स (माहवारी) में किसी भी प्रकार की समस्या जैसे अनियमित पीरियड्स और इस दौरान बहुत ज्यादा दर्द महसूस होना जैसी समस्याएं हो रही हों, तो डॉक्टर से जाँच ज़रूर करा लेनी चाहिए। ताकि इसे समस्य रहते दवाओं के जरिये ठीक किया जा सके।

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